नवाब वाजिद अली शाह Zoological Garden (लखनऊ चिड़ियाघर): ‘नवाबों का शहर’ ऐतिहासिक ‘बनारसी बाग’ की संपूर्ण गाइड 2026

लखनऊ जहां हर थोड़ी-थोड़ी दूर पर आपको इतिहास की कारीगरी, तहज़ीब या नवाबों के शौक से बनी कई विशाल जगहें मिल जाएंगी जिनसे आज के लोगों को पता चलता है कि लखनऊ यूं ही नहीं नवाबों और तहज़ीब का शहर कहा जाता है और आज हम उन्हीं प्रमुख जगहों में से एक लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह Zoological Garden (लखनऊ चिड़ियाघर) की सैर को जानेंगे जिसे लखनऊ का हरा फेफड़ा भी कहा जाता है।

नवाब वाजिद अली शाह Zoological Garden हज़रतगंज के बीचोंबीच के शोर-शराबे से कुछ दूर है जो लगभग 71.6 एकड़ (लगभग 29 हेक्टेयर) में फैला विशाल चिड़ियाघर है जिसे आधिकारिक तौर पर ‘नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान’ और ऐतिहासिक रूप से ‘प्रिंस ऑफ वेल्स जूलॉजिकल गार्डन’ या ‘बनारसी बाग’ के नाम से जानते हैं।

अगर आप लखनऊ आ रहे हैं या लखनऊ में ही रहते हैं और लखनऊ चिड़ियाघर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह लेख आपके लिए सबसे सटीक मार्गदर्शन होगा जिसमें न केवल इतिहास और खासियत शामिल है बल्कि आपको ऑटो, बस या ट्रेन का ताज़ा किराया और अंदर की छिपी हुई खासियतों की जानकारी भी मिलेगी।

लखनऊ चिड़ियाघर का अनोखा इतिहास

lucknow zoo history Nawab Nasir-ud-Din Haider

यहां पहले चिड़ियाघर नहीं था बल्कि 18वीं सदी में अवध के नवाब नासिरुद्दीन हैदर ने इसे आम के बाग (Mango Orchard) के रूप में बनवाया जिसे आज के बुज़ुर्ग अभी भी बनारसी बाग के नाम से जानते हैं।

  • स्थापना: आधिकारिक तौर पर इस Zoological Garden की स्थापना 29 नवंबर 1921 में हुई थी जिसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल सर स्पेंसर हारकोर्ट बटलर ने तत्कालीन बनवाया था, तत्कालीन इसलिए क्योंकि वेल्स के राजकुमार (Prince of Wales) के लखनऊ आगमन के लिए आने वाले थे और उनकी स्मृति में इसे जल्दी बनवाना था और इसी वजह से इसका नाम प्रिंस ऑफ वेल्स जूलॉजिकल गार्डन भी पड़ा।
  • नामों का सफर: साल 2001 में सरकार ने इसका नाम बदलकर लखनऊ Zoological Garden कर दिया लेकिन साल 2015 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अवध के अंतिम नवाब के सम्मान के लिए इस गार्डन का नाम नवाब वाजिद अली शाह Zoological Garden रख दिया।
  • स्थानांतरण पर रोक (नवीनतम जानकारी): कुछ समय पहले इस चिड़ियाघर को कुकरैल जंगल में शिफ्ट करने की बात की गई थी लेकिन हाल ही में जुलाई 2026 में Central Empowered Committee (CEC) ने पर्यावरण और पेड़ों की कटाई पर आने वाली चिंताओं को ध्यान में रखते हुए चिड़ियाघर को कुकरैल जंगल में शिफ्ट करने की योजना को खारिज कर दिया। अब यह गार्डन कहीं नहीं जाएगा और पहले से भी अच्छी सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

लखनऊ Zoo कैसे पहुंचे: रास्ता, किराया और सटीक दूरी

लखनऊ Zoo हज़रतगंज क्षेत्र सिविल हॉस्पिटल के बिल्कुल सामने है और यह लखनऊ के बीचोंबीच है जहां आप किसी भी कोने से बड़ी आसानी से आ सकते हैं।

charbagh railway front view
  • रेलवे: आप लखनऊ के किसी भी कोने से चारबाग रेलवे स्टेशन आ सकते हैं जहां से चिड़ियाघर लगभग 4 किमी दूर है और आप ऑटो, ई-रिक्शा या कैब बुकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करके Zoo तक आ सकते हैं।
  • हवाई अड्डा: लखनऊ Zoo पहुंचने के लिए अगर आप बाहर से हवाई जहाज़ से आ रहे हैं तो सबसे पास का हवाई अड्डा चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (अमौसी) सबसे पास रहेगा जिसकी दूरी लखनऊ Zoo से 17.6 किमी है अगर आप लखनऊ रोड प्रयागराज हाईवे से आते हैं।

परिवहन के विभिन्न विकल्पों पर किराया सूची (वर्ष 2026 के आंकड़ों पर आधारित)

1. सिटी बस (Chalo Bus/Electric Bus)

lucknow electric bus

यहां लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (LCTSL) की इलेक्ट्रिक AC या Non-AC बसें चलती रहती हैं जो सबसे अच्छा विकल्प है:

  • चारबाग से हज़रतगंज/चिड़ियाघर रास्ता: चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने आते ही आपको हज़रतगंज या गोमतीनगर जाने के लिए बसें मिल जाएंगी और इन बसों का न्यूनतम किराया 11 रुपये होता है और Zoo तक का किराया 20 से 25 रुपये होता है।

2. लोकल ऑटो/शेयरिंग ऑटो/ई-रिक्शा

  • शेयरिंग ऑटो: चारबाग से हज़रतगंज के लिए आपको शेयरिंग ऑटो या ई-रिक्शा मिल जाएंगे जिसका किराया 20 रुपये या कभी-कभी 25 रुपये होता है और अगर आप 30 रुपये तक देते हैं तो कुछ ऑटो वाले आपको सीधे लखनऊ Zoo ले जाएंगे।
  • आरक्षित बुकिंग ऑटो: लखनऊ में बुकिंग आधारित ऑटो सेवाएं बहुत अच्छी हैं इसके लिए आप Ola, Uber या Rapido जैसे बुकिंग ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपको सीधे लखनऊ Zoo तक ले जाएंगे जिसका किराया 40 से 70 रुपये हो सकता है जो समय और ट्रैफिक के हिसाब से कम-ज़्यादा हो सकता है।

3. लखनऊ मेट्रो (तेज़ और ट्रैफिक-मुक्त)

  • लखनऊ मेट्रो स्टेशन: आप लखनऊ के किसी भी मेट्रो स्टेशन से हज़रतगंज मेट्रो स्टेशन या सचिवालय मेट्रो स्टेशन पहुंच सकते हैं और चारबाग मेट्रो स्टेशन से भी वहां की दूरी 20 मिनट की है।

प्रवेश शुल्क, समय और अतिरिक्त खर्च (नवीनतम 2026 आंकड़े)

चिड़ियाघर प्रबंधन द्वारा ऑनलाइन टिकट बुकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि आप लखनऊ Zoo की आधिकारिक वेबसाइट से टिकट बुक करते हैं, तो आपको लाइनों से मुक्ति मिलती है और कुछ विशेष ऑफर्स में छूट भी मिल जाती है।

टिकट दरें

श्रेणीकेवल प्रवेश टिकटपैकेज टिकट (प्रवेश + एक्वेरियम + टॉय ट्रेन + Nocturnal House)
वयस्क (12 वर्ष से अधिक)₹80₹100 (सबसे किफायती विकल्प)
बच्चे (5 से 12 वर्ष)₹40₹50
छोटे बच्चे (5 वर्ष से कम)निःशुल्कनिःशुल्क (गतिविधियों को छोड़कर)

अतिरिक्त गतिविधियां और खर्चे

  • बच्चों की ट्रेन: आप छोटी ट्रेन की सवारी भी ले सकते हैं जिसमें बड़ों के लिए 25 से 30 रुपये और बच्चों के लिए 1 रुपये है
  • पैडल बोटिंग: हर एक व्यक्ति के लिए 50 रुपये का टिकट लगता है जिसमें आपको 20 मिनट तक बोटिंग करने को मिलेगा।
  • बैटरी वाहन (गोल्फ कार्ट/शटल): अगर आपके साथ कोई बुज़ुर्ग है या आप पैदल Zoo नहीं घूमना चाहते हों तो आप 600 रुपये प्रति घंटा देकर इलेक्ट्रिक गाड़ी बुक कर सकते हैं।
  • कैमरा शुल्क: लखनऊ Zoo में आप कैमरे से मुफ्त में फोटोग्राफी नहीं कर सकते, इसके लिए आपको 200 रुपये का टिकट लेना होगा, लेकिन आप अपने फोन से मुफ्त में फोटोग्राफी कर सकते हैं।
  • पार्किंग शुल्क: यहां 20 रुपये बाइक पार्किंग या 50 रुपये कार (चार पहिया वाहन) पार्किंग के लिए देना होगा।

Zoo का समय

  • कार्य दिवस: Zoo सिर्फ मंगलवार से रविवार (सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे तक) ही खुलता है और सोमवार को चिड़ियाघर पूरी तरह बंद रहता है। (होली के दिन भी यह बंद रहता है)।
  • विशेष निर्देश: चिड़ियाघर बंद होने के ठीक 30 मिनट पहले मुख्य काउंटर से अंतिम प्रवेश टिकट मिलना बंद हो जाता है।

लखनऊ चिड़ियाघर की मुख्य खासियतें और आकर्षण

यह लखनऊ Zoological Garden कोई सामान्य बाग नहीं है जहां सिर्फ पिंजरों में कुछ जानवर हों बल्कि यहां 100 से भी ज़्यादा विभिन्न प्रजातियों के 1000 से ज़्यादा वन्यजीव प्राकृतिक परिवेश में निवास करते हैं। आइए मैं आपको बताता हूं इस चिड़ियाघर की वो खासियतें जो इसे अन्य चिड़ियाघरों से अलग बनाती हैं:

सफेद बाघ और बंगाल टाइगर

lucknow zoo's white tiger

यहां का सबसे मुख्य आकर्षण सफेद बाघ (White Tiger) और रॉयल बंगाल टाइगर है जो बड़े और प्राकृतिक स्वरूप वाले बाड़ों में रहते हैं जो इस तरह डिज़ाइन किए गए हैं कि दर्शक इन्हें बहुत करीब से और सुरक्षा से देख सकें।

Orangutan और उसका अनोखा निवास

Orangutan  at tree branch

लखनऊ चिड़ियाघर भारत के उन चुनिंदा 2 चिड़ियाघरों में से एक है जहां दुर्लभ प्रजाति का “Orangutan” पाया जाता है जो इंसानों जैसी हरकतें करता है और इसकी समझदारी भी काफी ज़्यादा है जो बच्चों और बड़ों दोनों को बहुत लुभाती है।

राजकीय संग्रहालय लखनऊ

lucknow zoo museum

चिड़ियाघर परिसर के अंदर ही उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक राजकीय संग्रहालय स्थित है, जिसकी स्थापना मूल रूप से 1863 में हुई थी। यहां अवध कालीन दुर्लभ कलाकृतियां, प्राचीन सिक्के, मूर्तियां और यहां तक कि एक प्रामाणिक मिस्र की ममी (Egyptian Mummy) भी संरक्षित है, जो इतिहास प्रेमियों के लिए किसी खज़ाने से कम नहीं है।

तितली उद्यान और आधुनिक बाल उद्यान

  • तितली उद्यान: इस उद्यान में तितलियों की दर्जनों स्थानीय और प्रवासी प्रजातियां देखने को मिलती हैं और यह उद्यान 2018 में खुला था।
  • बाल उद्यान (2026 की नई जानकारी): चिड़ियाघर प्रशासन ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के आधार पर बच्चों के लिए एक नया उद्यान बनाया है, जिसमें 14 आधुनिक झूले, वेव स्लाइड और हेक्सा-क्लाइंबर हैं, जो बच्चों के मज़े को दोगुना कर देते हैं।

मछली एक्वेरियम और (Nocturnal House)

  • एक्वेरियम: यहां दो मंज़िला विशाल इमारत है जहां स्थानीय और विदेशी मछलियों का विशाल संग्रह है।
  • Nocturnal House: यह वह जगह है जहां ऐसे जीवों को रखा जाता है जो सिर्फ रात को ही सक्रिय होते हैं जैसे उल्लू, साही, चमगादड़ या कुछ चिड़ियां।

ऐतिहासिक नवाबी बारादरी

चिड़ियाघर के ठीक बीचोंबीच अवध के नवाबों के ज़माने की एक खूबसूरत ‘बारादरी’ (मंडप) है, जो आज भी शान से खड़ी है। पहले नवाब यहां शाम की महफिलें सजाया करते थे। यह जगह कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी इस्तेमाल की गई है।

आखिर में कुछ बातें

नवाब वाजिद अली शाह Zoological Garden सिर्फ जानवरों को देखने की जगह नहीं है, बल्कि यह अवध के इतिहास (‘बनारसी बाग’ की पुरानी यादों), नवाबी तहज़ीब और प्रकृति का एक बेहद खूबसूरत संगम है। जब आप लखनऊ के इस ‘हरे फेफड़े’ में घूमते हैं, दुर्लभ Orangutan और रॉयल बंगाल टाइगर को देखते हैं, या राजकीय संग्रहालय में सालों पुरानी मिस्र की ममी के सामने खड़े होते हैं, तब समझ आता है कि यह जगह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर किसी के लिए कितनी खास है।

सबसे अच्छी बात यह है कि कुकरैल शिफ्ट न होने के फैसले के बाद, यह अब भी शहर के बिल्कुल बीचोंबीच (हज़रतगंज के पास) मौजूद है जहां पहुंचना बेहद आसान है। मात्र ₹100 से ₹250 के बजट में आपको वन्यजीव, ऐतिहासिक बारादरी, टॉय ट्रेन, एक्वेरियम और तितली उद्यान का जो पूरा पारिवारिक पैकेज मिलता है, वो सच में पैसा-वसूल है।

तो अगली छुट्टी ऑनलाइन टिकट बुक कीजिए, अपने आरामदायक जूते पहनिए और निकल पड़िए नवाबों के शहर के इस सबसे ऐतिहासिक और खूबसूरत चिड़ियाघर की सैर पर!

मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top