आज हम लखनऊ के नहीं, भारत के नहीं बल्कि पूरे एशिया के सबसे बड़े पार्क जनेश्वर मिश्रा पार्क पर बात करेंगे जो लगभग 376 एकड़ (152 हेक्टेयर) के क्षेत्र में फैला है। इस पार्क को समाजवादी नेता स्वर्गीय जनेश्वर मिश्रा की स्मृति में अगस्त 2014 में लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर विकसित किया गया है और इसे बनाने का सरकार का मकसद शहर को एक हरे-भरे फेफड़े की तरह ताज़ी ऑक्सीजन देने के लिए विकसित करना था।
जो लोग इस पार्क के बारे में नहीं जानते हैं वो इसे घास का मैदान समझते हैं लेकिन यह पार्क सिर्फ सामान्य मैदान तक सीमित नहीं है बल्कि यहां प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने वाली 2 मानव-निर्मित झीलें, मिग-21 लड़ाकू विमान की जीवंत प्रदर्शनी, और उत्तर प्रदेश का पहला अत्याधुनिक डिजिटल जुरासिक पार्क (डायनासोर पार्क) भी शामिल है इसलिए अगर आप लखनऊ में रहते हैं या लखनऊ आने वाले हैं तो मेरी एक सलाह है कि आप एक बार यहां ज़रूर आएं।

पार्क कैसे पहुंचे और स्थानीय परिवहन का किराया (2026 की ताज़ा जानकारी)
लखनऊ के सबसे मुख्य स्टेशन चारबाग रेलवे स्टेशन (LJN/LKO) या हज़रतगंज से सीधे जनेश्वर मिश्रा पार्क जाने की दूरी लगभग 10 से 13 किमी है और पार्क पहुंचने के लिए हमारे पास तीन सबसे अच्छे और बजट के अनुकूल रास्ते और साधन हैं:
1. ऑटो का किराया और ई-रिक्शा का किराया
- शेयरिंग या ई-रिक्शा: अगर आप पार्क जाने के लिए सीधा ऑटो लेना चाहेंगे तो सीधा ऑटो मिलना थोड़ा मुश्किल है, इसके लिए आपको 2 या 3 बार में यात्रा पूरी करनी होगी। सबसे पहले ट्रेन से उतरने के बाद आपको चारबाग से हज़रतगंज जाना होगा जिसका किराया 10 से 15 रुपये होगा और फिर आपको दूसरा ऑटो लेना होगा जो हज़रतगंज से पत्रकारपुरम या लोहिया पार्क तक के लिए होगा जिसका 15 से 20 रुपये किराया लगेगा और फिर वहां से आपको जनेश्वर मिश्रा पार्क के गेट नंबर 2 या 6 तक जाना होगा जिसका किराया 10 से 15 रुपये है।
- आरक्षित/बुकिंग ई-रिक्शा: अगर आप चारबाग या हज़रतगंज से जनेश्वर मिश्रा पार्क के लिए Rapido या Uber जैसे ऐप से ई-रिक्शा बुक करते हैं तो अभी के समय आपका किराया 150 से 200 रुपये तक होगा और अगर आप रात में या ज़्यादा ट्रैफिक में बुक करते हैं तो यह किराया 220 से 230 तक हो सकता है। आरक्षित बुकिंग ऑटो का फायदा यह है कि आप कहीं से भी सीधे पार्क के गेट तक पहुंच सकते हैं और बार-बार ऑटो बदलना भी नहीं पड़ता।
2. सिटी बस का रास्ता और किराया

लखनऊ में लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (LCTSL) की इलेक्ट्रिक या वातानुकूलित (AC) बसें इस रास्ते पर बेहद आसानी से मिलती हैं और आरामदायक भी हैं:
- बस का रास्ता: वैसे LCTSL की बसें हर थोड़ी देर में आती हैं लेकिन चारबाग से सीधे जनेश्वर पार्क के लिए बस बहुत कम मिलती है इसलिए मैं सलाह दूंगा कि आप चारबाग से गोमती नगर जाने वाली किसी भी बस में चढ़ जाइए और लोहिया पार्क स्टॉप या पत्रकारपुरम चौराहे पर उतर जाइए। यहां से जनेश्वर पार्क की दूरी लगभग 2 से 2.5 किमी है और यहां से ऑटो-रिक्शा आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा आप कामता या शहीद पथ के रास्ते भी गोमती नगर विस्तार के गेट नंबर 6 या 7 पर पहुंच सकते हैं।
- बस का किराया: लखनऊ सिटी के अनुसार LCTSL के किराया ढांचे के तहत न्यूनतम किराया 11 रुपये से शुरू है और चारबाग से गोमती नगर के इलाके तक सामान्य बस का किराया 25 से 30 रुपये होता है और AC बस का किराया 30 से 40 रुपये प्रति व्यक्ति। और आप Lucknow Chalo ऐप से असली समय में बस कहां है यह देख सकते हैं और ऑनलाइन टिकट भी बुक कर सकते हैं।
3. मेट्रो का रास्ता

बिना ट्रैफिक के सबसे जल्दी पार्क तक पहुंचने के लिए लखनऊ की मेट्रो सबसे अच्छी है। आप चारबाग मेट्रो स्टेशन से सचिवालय या हज़रतगंज मेट्रो स्टेशन पर उतर सकते हैं जिसमें आपका मेट्रो का किराया 20 से 30 रुपये लगेगा। वहां से आप स्थानीय ऑटो ले सकते हैं जिसका किराया 10 से 15 रुपये होगा या चाहें तो आप Ola, Rapido या Uber जैसी सेवा का इस्तेमाल भी कर सकते हैं जिसका किराया पार्क तक 80 से 110 रुपये होगा।
पार्क के अंदर जाने का खर्च, टिकट और समय

पार्क में प्रवेश लेने से लेकर समय तक हर एक जानकारी जो 2026 के हिसाब से ताज़ा है उसकी पूरी सूची नीचे दी गई है:
| गतिविधि/आकर्षण | समय | टिकट शुल्क (प्रवेश/गतिविधि शुल्क) |
|---|---|---|
| सामान्य पार्क प्रवेश | सुबह 5:00 से रात 8:00 बजे | ₹15 प्रति व्यक्ति (सुबह 5 से 8 बजे तक मॉर्निंग वॉकर्स के लिए मुफ्त) |
| जुरासिक पार्क (डायनासोर पार्क) | शाम 4:30 से रात 9:00 बजे | ₹120 प्रति व्यक्ति (यह उत्तर प्रदेश का पहला एनिमेट्रोनिक्स पार्क है) |
| गोंडोला बोट राइड | शाम 4:00 से शाम 7:30 बजे | ₹100 प्रति व्यक्ति (वेनिस जैसी नाव का अहसास) |
| पैडल बोट | शाम 4:00 से रात 8:00 बजे | ₹50 (30 मिनट के लिए) |
| साइकिल किराए पर | सुबह और शाम (पार्क के समय अनुसार) | ₹20 से ₹30 प्रति घंटा (आधार कार्ड जमा करना अनिवार्य) |
| वाहन पार्किंग | पार्क के खुले रहने तक | दो-पहिया: ₹20, चार-पहिया: ₹50 |
जनेश्वर मिश्रा पार्क के मुख्य आकर्षण
अगर आप जनेश्वर पार्क आए हैं तो इन खास जगहों को देखना न भूलें क्योंकि इंटरनेट पर भी इन जगहों के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं है लेकिन यही पार्क की शोभा बढ़ाते हैं और इस पार्क को अनोखा बनाते हैं:
- बोलने वाले डायनासोर (जुरासिक पार्क): पार्क के गेट नंबर 2 के पास स्थित इस नए आकर्षण में स्टॉल पर बहुत बड़े-बड़े डायनासोर की मूर्तियां लगी हैं जो न केवल हिलती-डुलती हैं बल्कि डायनासोर की तरह दहाड़ती भी हैं जो बच्चों, नई पीढ़ी या फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए सबसे अच्छी जगह है।

- भारतीय सेना का मिग-21 लड़ाकू विमान: देश के वीरों को श्रद्धांजलि देते हुए यहां एक असली लड़ाकू विमान बहुत ऊंचे मंच पर रखा गया है, जो राष्ट्रभक्ति और गौरव का एहसास कराता है।

- एशिया का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज: पार्क के बिल्कुल बीचोंबीच एशिया का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज लहराता है जो लगभग 207 फीट ऊंचा है और यह भारतीय तिरंगे की शान बढ़ाता है। अगर आप पार्क की तरफ जाएंगे तो यह ध्वज आपको कुछ किलोमीटर दूर से ही दिख जाएगा।
- रोशनी, ध्वनि-शो और म्यूज़िकल फाउंटेन: शाम के समय पार्क के अंदर पानी की स्क्रीन पर ध्वनि के साथ लेज़र शो होता है जो संगीत के साथ भारत के इतिहास और संस्कृति को दर्शाता है।

एक दिन की बेहतरीन सैर की पूरी योजना
अगर आप जनेश्वर पार्क का पूरा आनंद लेना चाहते हैं तो आपके लिए दोपहर के बाद का समय सबसे अच्छा रहेगा। मेरी इस खास योजना पर चलें:
- दोपहर 3:30 बजे प्रवेश: सबसे पहले जनेश्वर मिश्रा पार्क के गेट नंबर 2 से 3 बजे के बाद प्रवेश लें और अगर धूप कम हो तो एक साइकिल किराए पर ले लें जिससे आप पूरे 376 एकड़ में घूम सकें और पार्क को पूरी तरह देख सकें।
- शाम 6:40 बजे (म्यूज़िकल फाउंटेन): शाम के समय झील के पास बने खुले रंगमंच जैसी बड़ी और रंग-बिरंगी रोशनी वाले शो और संगीत की धुन पर थिरकती पानी की लहरों का आनंद लें और खूब सारी तस्वीरें लें।
- रात 8:00 बजे (स्ट्रीट फूड): पूरे दिन घूमने के बाद भूख तो लगती है इसलिए पार्क के गेट नंबर 2 या 4 के बाहर लगी मशहूर चाट, कबाब पराठा या कुल्हड़ पिज़्ज़ा जैसे स्टॉल पर से कुछ भी खा सकते हैं जो आपको 30 से 100 रुपये में बढ़िया से बढ़िया खाना मिल जाएगा और इसे खाने के बाद आप अपनी इस यात्रा को समाप्त कर सकते हैं।
स्थानीय यात्रियों के लिए कुछ अंदरूनी सुझाव
- पैदल चलने की तैयारी: पार्क बहुत बड़ा है और स्थानीय लोगों के लिए यह सलाह है कि आप आरामदायक खेल के जूते पहनकर आएं और बुज़ुर्गों के लिए पार्क के अंदर गोल्फ कार्ट जैसी इलेक्ट्रिक गाड़ी की भी सुविधा है।
- ऑनलाइन टिकट: छुट्टी के दिनों (शनिवार और रविवार) को टिकट काउंटर पर बहुत भीड़ होती है इसलिए आपका समय बर्बाद न हो इसलिए आप UP Park Online System से डिजिटल QR कोड वाली टिकट ले सकते हैं।
- कैमरा और गैजेट्स: जनेश्वर मिश्रा पार्क फोटोग्राफी या रील्स बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की बाकी मुख्य जगहों की तरह सबसे अच्छी जगह है।
आखिर में कुछ बातें
जनेश्वर मिश्रा पार्क सिर्फ एक घास का मैदान या सामान्य पार्क नहीं है, बल्कि यह सच में लखनऊ का “हरा फेफड़ा” और पूरे एशिया का गौरव है। जब आप 376 एकड़ में फैले इस हरे-भरे माहौल में साइकिल चलाते हैं, एशिया के सबसे ऊंचे तिरंगे को लहराते देखते हैं, और शाम को झील के किनारे ठंडी हवाओं के बीच म्यूज़िकल फाउंटेन का मज़ा लेते हैं, तब असली सुकून का एहसास होता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि आज के समय में जहां मनोरंजन और घूमना-फिरना इतना महंगा हो चुका है, वहीं जनेश्वर मिश्रा पार्क आपको मात्र ₹100 से ₹300 के बजट में प्रकृति, रोमांच (जुरासिक पार्क और नौका विहार) और बेहतरीन स्ट्रीट फूड का एक पूरा पैकेज देता है। चाहे आप परिवार के साथ पिकनिक मनाना चाहते हों, दोस्तों के साथ रील्स बनानी हों, या छुट्टी के दिन कुछ पल शांति से बिताने हों — यह पार्क आपकी हर उम्मीद पर खरा उतरता है।
तो अगली छुट्टी घर पर बैठकर बोर मत होइए! आरामदायक जूते पहनिए, कैमरा तैयार कीजिए और निकल पड़िए एशिया के सबसे बड़े पार्क की इस खूबसूरत सैर पर। अगर आप पहले से यहां जा चुके हैं, तो अपनी पसंदीदा जगह कमेंट करके ज़रूर बताएं!
मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं!

मैं प्रियांशु राज हूँ; मैं लखनऊ के आस-पास की जगहों को देखूँगा और आपके घूमने-फिरने के लिए सबसे अच्छे रास्ते और तरीके बताऊँगा।