माँ चंद्रिका देवी मंदिर लखनऊ यात्रा गाइड 2026: इतिहास, पहुंचने के रास्ते, बस-ऑटो किराया और आस-पास के प्रमुख आकर्षण

अगर आप उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहते हैं या शहर के शोर-शराबे से दूर किसी शांत और धार्मिक जगह जाना चाहते हैं तो लखनऊ का चंद्रिका देवी मंदिर आपके लिए बहुत बेहतरीन विकल्प हो सकता है। लखनऊ के बख्शी का तालाब के पास कठवारा गांव में यह मंदिर है, यह मंदिर सिर्फ कोई धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि गोमती नदी के पास होने से यह एक शांत सैर की जगह भी बन जाता है।

इस स्थानीय सैर के लेख में मैं आपको चंद्रिका देवी मंदिर जाने का पूरा रास्ता और तरीका बताऊंगा जिससे आपके पैसे भी कम लगें और साथ ही मंदिर का इतिहास, खासियत और कैसे घूमना है वो सब, साथ ही आपको बस, ऑटो या बाइक में से किसे लेकर जाना चाहिए वो सब बताऊंगा।

माँ चंद्रिका देवी मंदिर का संक्षिप्त विवरण

chandrika devi mandir
मुख्य बिंदुविवरण
मुख्य देवीमाँ चंद्रिका देवी (दुर्गा जी का रूप)
स्थानकठवारा गांव, बख्शी का तालाब, लखनऊ
दूरीलखनऊ चारबाग रेलवे स्टेशन से लगभग 28–30 किमी
प्रवेश शुल्कपूरी तरह से निःशुल्क
सर्वोत्तम समयनवरात्रि, अमावस्या और अक्टूबर से मार्च के बीच

पौराणिक इतिहास और धार्मिक महत्व

माँ चंद्रिका देवी मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इसे महाभारत या रामायण काल से भी जोड़ा जाता है इसी वजह से यह बहुत प्रसिद्ध है।

  • रामायण काल की कथा: मान्यताओं के हिसाब से, लखनऊ के संस्थापक लक्ष्मण जी के बड़े बेटे चंद्रकेतु एक बार अश्वमेध घोड़े के साथ गोमती नदी के पास से गुज़र रहे थे। तभी अचानक जंगल में घना अंधेरा छा गया जिससे उनको डर लगने लगा और तभी उन्होंने वहीं पर माँ दुर्गा को याद किया और कुछ देर बाद माँ दुर्गा अलौकिक चंद्रप्रकाश के साथ प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए और इस घटना के बाद उस जगह को माँ चंद्रिका देवी स्थल के नाम से जाना जाने लगा और बाद में वहां एक भव्य मंदिर बना।
  • महाभारत काल की प्रासंगिकता: ऐसा माना जाता है कि इस स्थल पर द्वापर युग में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान विश्राम किया था और साथ ही घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने यहां पर श्री कृष्ण जी की 3 वर्षों तक तपस्या की थी और इसी वजह से चंद्रिका देवी स्थल बहुत पावन और प्रसिद्ध है।
  • नीम के पेड़ का रहस्य: 12वीं शताब्दी में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी। लेकिन लगभग 250 वर्ष पहले, स्थानीय ग्रामीणों को एक प्राचीन नीम के पेड़ के कोटर (खोखले भाग) में माता की प्राकृतिक शिला रूपी पिंडियां मिलीं, जिसके बाद यहां पुनः भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया।

लखनऊ के बीचोंबीच हज़रतगंज से चंद्रिका देवी मंदिर कैसे पहुंचे

हज़रतगंज से मंदिर जाने के कई रास्ते हैं और कई साधन भी, मैं आपको एक-एक करके सभी के बारे में बताता हूं।

महानगर होते हुए सीतापुर रोड से मंदिर का रास्ता

सबसे पहला रास्ता है जिस रास्ते से मैं खुद कई बार गया हूं, हज़रतगंज के किसी भी रास्ते या चौराहे से आप ऑटो ले सकते हैं, मेरे हिसाब से ऑटो सबसे अच्छा साधन है क्योंकि यह तुरंत मिल भी जाता है और किराया भी कम है।

ऑटो सीधे मंदिर तक नहीं जाता है बल्कि हमें 2 या 3 बार ऑटो बदलना होगा, सबसे पहले मैं हज़रतगंज से सीधे बिथौली क्रॉसिंग जाने के लिए ऑटो लूंगा जिसका किराया 30 रुपये पड़ता है जो मैंने खुद कई बार दिया है।

बिथौली क्रॉसिंग पहुंचने के बाद हमें फिर से एक ऑटो लेना होगा जिससे हम बख्शी का तालाब के पास चंद्रिका देवी मंदिर के रास्ते के गेट तक पहुंचेंगे, बिथौली से मंदिर के रास्ते तक पहुंचने के लिए आपको ऑटो वाले को 15 रुपये देने होंगे और अगर आप ऑटो वाले से बात करते हैं तो शायद वही ऑटो मंदिर तक भी चले लेकिन अगर नहीं जाता तो हम तीसरा ऑटो लेंगे।

bitholi crossing

तीसरा ऑटो आपको बख्शी का तालाब मंदिर के रास्ते में ही मिल जाएगा जो मंदिर तक जाने के लिए 20 रुपये तक ले सकता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि मंदिर में जब ज़्यादा लोग पहुंचने लगते हैं तो ऑटो वाले ज़्यादा किराया लेते हैं लेकिन 20 रुपये से ज़्यादा नहीं।

जेहटा होते हुए लखनऊ आउटर रिंग रोड से मंदिर का रास्ता

यह दूसरा रास्ता है जहां से आप हज़रतगंज से होते हुए जेहटा मॉल मार्ग से लखनऊ आउटर रिंग रोड होते हुए मंदिर तक जा सकते हैं, इस रास्ते में ऑटो मिलना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन रिंग रोड पहुंचते ही ऑटो मिलने लगते हैं, हज़रतगंज चौराहे से आपको पहले लोधी चौराहे तक एक ऑटो से जाना है जिसका किराया 25 रुपये है। लोधी चौराहे तक पहुंचते ही आपको दूसरा ऑटो लेना है और सीधे मंदिर तक ऑटो मिल जाएगा जिसका किराया 35 से 40 रुपये होगा। यह रास्ता इतना अच्छा नहीं है इसलिए मेरा सुझाव है कि आप सीतापुर रोड होते हुए ही जाएं।

चंद्रिका देवी मंदिर की खासियत

त्रिमूर्ति रॉक-कट मूर्ति

मंदिर के गर्भगृह के अंदर एक प्राकृतिक पत्थर पर इस मूर्ति को उकेर के बनाया गया है, यह मूर्ति किसी एक भगवान की नहीं है बल्कि इसमें 3 सिर हैं, इन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का प्रतीक माना जाता है। साथ ही मूर्ति के दाईं और बाईं ओर नौ दुर्गा की पिंडियां भी स्थापित हैं।

महिसागर तीर्थ

मंदिर के पास एक विशाल कुंड है जिसे ‘सुधन्वा कुंड’ या ‘महिसागर तीर्थ’ के नाम से जाना जाता है और इस कुंड के बीचों-बीच भगवान शिव की एक विशाल काले रंग की मूर्ति भी है, बारिश के समय कुंड का पानी मूर्ति तक भर जाता है। बहुत से लोग इस पानी में स्नान करते हैं लेकिन मैंने पानी को जांचा था और यह इतना साफ नहीं है कि इसमें नहाया जाए।

मुंडन और हवन अनुष्ठान

यह जगह मुंडन और कई पूजाओं के हवन के लिए बहुत प्रसिद्ध है, लोग दूर-दूर से अपने बच्चों का मुंडन कराने के लिए यहां तक आते हैं। इन सभी कामों के लिए मंदिर के पिछले हिस्से में सभी व्यवस्थाएं हैं।

मंदिर के आस-पास क्या है खास?

चंद्रिका देवी के दर्शन के बाद, आप इन जगहों और अनुभवों का आनंद ले सकते हैं:

  • काल भैरव मंदिर: मुख्य मंदिर के ठीक पीछे भगवान काल भैरव को समर्पित एक छोटा और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी माँ के दर्शन के बाद भैरव बाबा का आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना जाता है।
  • आम के बाग और सैर की जगह: मंदिर के आस-पास का पूरा इलाका प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। यहां आम के बड़े-बड़े बाग हैं, जहां लोग अपने परिवार के साथ बैठकर घर का बना खाना खाते हैं और सैर मनाते हैं।
  • स्थानीय बाज़ार और खाने-पीने की चीज़ें: मंदिर के बाहर एक जीवंत ग्रामीण बाज़ार लगता है। यहां मिलने वाली गरमा-गरम चाय और पकौड़े श्रद्धालुओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, आप यहां मिट्टी के खिलौने, सिंदूर, माता का श्रृंगार का सामान और प्रसाद भी खरीद सकते हैं।
  • मरीनो वाटर पार्क: अगर आप गर्मियों में यहां आ रहे हैं और बच्चों के साथ मज़ेदार गतिविधियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो मंदिर के ठीक पास (कठवारा गांव में ही) मरीनो वाटर पार्क और रिज़ॉर्ट है, जहां आप अपनी यात्रा को और भी यादगार बना सकते हैं।

मंदिर की समय सारणी और आरती का समय

भीड़ से बचने और सुकून से दर्शन करने के लिए आपको मंदिर के समय की जानकारी होनी चाहिए:

  • खुलने का समय: प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और दोपहर 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक। (अमावस्या और नवरात्रि के दिनों में मंदिर रात 11 बजे तक खुला रहता है)।
  • मंगला आरती: सुबह 6:00 बजे
  • मध्याह्न आरती: दोपहर 1:00 बजे
  • संध्या आरती: शाम 7:00 बजे

निष्कर्ष

मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगा लेकिन अगर आप किसी शांत जगह जाना चाहते हैं तो चंद्रिका देवी मंदिर आपके लिए बेहद अच्छा मंदिर हो सकता है। यहां जाने के लिए आपको ज़्यादा पैसे भी नहीं लगेंगे। यहां पर सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि मंदिर के आस-पास भी बहुत सी जगहें हैं जहां आप घूम सकते हैं।

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